शनिवार, 16 जनवरी 2016
असल पहलवान
टाल ठोकी रहल अछि
सिकि पहलवान
बुझेबामे लागल अछि लोककेँ
हमरेमे अछि जान
मुदा सत्य बस एतवे छैक
अपने टाल पर हिलि रहल अछि
सिकि पहलवान
असल पहलवान
पतिया लगवाक डर सँ
नहि भीड़ रहल अछि।
संजय झा " नागदह "
सिकि पहलवान
बुझेबामे लागल अछि लोककेँ
हमरेमे अछि जान
मुदा सत्य बस एतवे छैक
अपने टाल पर हिलि रहल अछि
सिकि पहलवान
असल पहलवान
पतिया लगवाक डर सँ
नहि भीड़ रहल अछि।
संजय झा " नागदह "
विद्यापतिक मीनार
एकसर विद्यापति
ठाढ़ केलाह मैथिलीक मीनार
एहन मीनार
जे दुनियाँ देखय
कतेक केलाह
एहि पर विचार।
कतेक मैथिलीक विद्वतजन
खोदि - खोदि देखला मीनार
केहन पदार्थ लगाओल एहिमे
अछि एखनो धरि संदिग्ध विचार।
नज़रि कतेको के टिक नहि सकल
कियाक
मीनार तs छैक सूर्य सँ सटल
करय पड़त नित
एहि लेल योग
तखनहि भेटत
एकर संयोग।
खोदला सब कियो मिलि जैड एकर
नोचय - पटकयमे लागल छथि सब
नहि बुझि सकल
कियो आदि - अंत
तइयो,
कोरियाबयमे लागल अछि सब।
मैथिली भाषाक स्तम्भ
ओ ठाढ़ केलाह
नहि नेतागिरीमे भाग लेलाह
नहि केलाह कहियो
धरना ओ प्रदर्शन
करेलाह
कलम मात्र सँ
दुनियाँ के मिथिलाक दर्शन ।
आऊ
हम सब मिलि करि
हिनक बन्दन
एहि मैथिल पुत्र
मैथिलीक पुत्रकेँ
"संजय"क अछि
चरण बंदन।
संजय झा "नागदह "
शायरी
हम तो उठ खड़ा हो गये -
जज्बाते इश्क देखकर
इस तूफ़ान में शमाँ -
बेसक जल भी जाए
शमाँ जलते ही खुद बुझ गयी -
जलाती हुई शमाँ को देख कर।
---- संजय झा नागदह
Dated : 13/01/2016
जुवां सहम गयी तेरी दीदार से
ऐसा लगा अमावस कि रात पूर्णिमा हो गई
जैसे ही कि तुमने जाने कि बात
वही दिन और वही रात हो गई ।
--------संजय झा "नागदह"
Dated :22/03/2014
इंकार मुहब्बत कौन करे
जब डूबा दोनों प्यार कि सागर में
पहले तुम निकलो तो तुम निकलो
दोनों डूब गए इस सागर में।
-----------संजय झा "नागदह"
Dated :22/03/2014
जुवां सहम गयी तेरी दीदार से
ऐसा लगा अमावस कि रात पूर्णिमा हो गई
जैसे ही कि तुमने जाने कि बात
वही दिन और वही रात हो गई ।
--------संजय झा "नागदह"
Dated :22/03/2014
इंकार मुहब्बत कौन करे
जब डूबा दोनों प्यार कि सागर में
पहले तुम निकलो तो तुम निकलो
दोनों डूब गए इस सागर में।
-----------संजय झा "नागदह"
Dated :22/03/2014
स्थिति नियंत्रित अछि
आब नै रहल ओ समय
जे, काकी कहितथि
बौआ
कनि कक्का के बजा दिय
आ असोरा पर सँ कहियनु
जे कनि बोड़ा घुसका दिय
आब त अनुत्तरित कॉल पर
कक्का उपस्थित
स्थिति नियंत्रित अछि ।
हमरा याद अछि
बाबाक प्रातः कालक स्तुति
आ बाबीक प्राति
आ चारिये बजे भोर सँ
कहियो जाँतक खर -खर
त’ कहियो ढ़ेकीक धप - धप
आ जौं दुनू में सँ किछु नहि
त' सूपक आवाज फट - फट
आब त’ नहि रहला बाबा
आ नै रहल बाबीक सामर्थ
झुकी- लिबी चलै छथि
कोनो ना जीबय छथि
स्थिति नियंत्रित अछि ।
नै रहल हर , त’ फारक बाते कोन
लोहरा ओ पसाढी जे
चलि गेल हर - फारेक संग
करिन छल लकड़ी के
खा गेल स्थायी घुन
चलि गेल सबदिना लेल
करिन सँ ,पटबक धुन
लोहार अभियंता भेल
पटबन लेल दमकल भेल
जोतय लेल ट्रेक्टर भेल
कतय सँ लायब
विवाहक राति लेल पालो ?
स्थिति नियंत्रित अछि ।
पहिले भेल पलायन
माल - जाल मिथिलाके
खाली बथान भेल
सुन्न दलान भेल
हमरा आ आहाँ सँ
बुझि गेल ओ
पहिने जे
भविष्य नहि अछि
मिथिलामे
के करत घर आ के करत बाहर जे ?
सर्दी आ गर्मीमे
के करत घूर आ के करत ओछरा जे ?
आ सुच्चा जे मैथिल छल
सबटा परा गेल
छागर सबटा दुर्गा जी खा गेल
भेट नहि रहल बच्चा के
गायक दूध ,मायक दूध
स्थिति नियंत्रित अछि ।
लेखक - संजय कुमार झा "नागदह "
दिनांक :31/07/2014
(लेखक के प्रकाशन लेल अधिकार सुरक्षित , प्रकाशन लेल किनको देल जा सकैछ)
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