सोमवार, 8 सितंबर 2025

“पेन ड्राइवमे पृथ्वी” – कवि अजीत आजाद

 “पेन ड्राइवमे पृथ्वी” – कवि अजीत आजाद

मैथिली साहित्यक नव प्रयोगशील स्वर रूपेँ कवि अजीत आजादक कविता संग्रह “पेन ड्राइवमे पृथ्वी” विशेष चर्चित अछि। एहि संग्रहमे कवि आधुनिक जीवनक तनाव, तकनीकी युगक विडम्बना, सामाजिक असमानता आ मानवीय संवेदनशीलता केँ धारदार भाषामे प्रस्तुत करैत छथि। शीर्षक सँ स्पष्ट अछि जे कवि परंपरा आ तकनीकक बीच संघर्षकेँ रचनात्मक रूपमे परोसबाक सफल प्रयास कएने छथि।
एहि कृति लेल कवि केँ साहित्य अकादमी पुरस्कार भेटल छन्हि, जे ई पुस्तकक महत्व आ साहित्यिक योगदानक प्रमाण अछि।
हमरा लेल ई संग्रह मात्र साहित्यिक कृति नहि, बल्कि व्यक्तिगत धरोहर सेहो अछि। कारण, ई पुस्तक कवि अजीत आजाद स्वयं अपन हाथ सँ हमरा भेंट कएलनि। एहन क्षणमे साहित्य पाठक आ लेखक बीचक दूरी खत्म भऽ जाइत अछि आ कविता मात्र पन्ना पर लिखल शब्द नहि रहि, आत्मीय संवाद बनि जाइत अछि।





संक्षेपमे, “पेन ड्राइवमे पृथ्वी” मैथिली कविता जगतक समकालीन स्वर अछि—जे परंपरा, तकनीक आ संवेदनाकेँ संग-संग ल’ क’ चलैत अछि, आ हमरा लेल ई अपन आत्मीयता सँ भरल स्मृति बनि गेल अछि।

चरिपतिया - गारता ओत्तहि खुट्टा


सबटा बात उचिते कहता, 
जूनि करू, मन खट्टा ।
मैथिल विज्ञ मित्र जौं चाही,
सम्हरि रहु, गारता ओत्तहि खुट्टा।

@संजय झा 'नागदह' 

गुरुवार, 7 अगस्त 2025

बीहनि कथा - चुप्प नै रहल भेल ?

रातुक बारह बजे कनियां सं फोन पर बतियाइत छत पर गेलौं कि देखैत छी आगि लागल। जोर सं हल्ला कैल हौ तेजन हौ तेजन रौ हेमन .. अपन पित्तियौत भैयारी सेहो अपन छत पर छल ओहो हल्ला केलक । सभ उठल कोनो ना आगि मिझाएल । भोरे जहन गाम दिस गेनौ तं एक गोटे कहै छथि .... अहीकें रातिमे धरफरी छल, कने काल चुप्प नै रहल भेल !

@ संजय झा 'नागदह'

संस्मरण ओ समीक्षा - मोनक चान सुरुज

डॉ. शेफालिका वर्मा, इ नाम साधारण नाम नहि थिक। मिथिलावासीक मध्य नञि जानि कतेकोकेँ दीदी, चाची, काकी, आ मातृस्वरूपा छथि। हिनका लोक मैथिलीक 'महादेवी वर्मा' कहि गौरवान्वित होइत अछि। हिनका हृदयमे स्नेहक समुद्र अछि जाहिमे जे चाहै जेना चाहै डुबकी लगाबय की ओहिठाम बैस मनोवृत्तिक अनुकूल स्नेहाशीष प्राप्त करै।

    हम प्रयास मात्र क' रहल छी जे अपन उद्गार, अनुभव कोना व्यक्त कएने छथि एहि पोथी 'मोनक चान सुरुज'क संस्मरणात्मक कथामे।

हमर अनुभव की ज्ञान एतेक की अंशो मात्र नहि जे समभाव राखि सकब। समयक अभाव तँ स्वाभाविके भ' गेल अछि। पोथीक उपलब्धता अमेज़ॉन पर रहबाक कारणें ऑनलाइन खरीद मंगबेलहुँ, जे जखन दिल्ली जाएब तँ समय निकालि पढ़ब। से जे से पोथी दिल्ली निवास स्थान पहुंच गेल। समय बीतल आ सोह धरि नञि रहल जे कोनो पोथियो पठउने छी सबटा बिसरा गेल छल। नोकरी-चाकरीक मध्य कतेको बातक सोह खासक' निजी जिनकीक हमरा जनैत कतेको लोककेँ नहि रहैत हेतन्हि, सैह हमरो भेल।

                   दिल्ली पहुँचलाक बाद अचानक एक दिन (बेबी) कनियाँ कहैत छथि जे हे लिअ अपन समान जे आहाँ ऑनलाइन अपना लेल पठौने छी। ओहीमे सँ निकलल 'मोनक चान सुरुज' आ देखितहिं मोनमे भेल जे कखन पढ़ब ! जकर मुख्य कारण छल आदरणीया मातृस्वरूपा डॉ. शेफालिका वर्मा जिनकर नित्यहिं आशीर्वाद हमरा व्हाट्सएपक माध्यमसँ भेटैत रहैत अछि।

खैर जे से तखनो समयक अभावे छल। तंजानिया सँ किछु दिनक लेल जखन छुट्टी पर भारत जाइत छी तँ कने आर वयस्तता बढ़ले रहैत अछि। इ काज, ओ काज, नाना प्रकारक काज, भेंट - घांट इत्यादि। मुदा चोट्टहिं पोथीकेँ लैपटॉप बैगमे राखि लेलहुँ जाहिसँ बिसरि नञि कम सँ कम संग चलिजाए। आ से नीके कएल, पोथी छुटबाक कोनो चारा नञि रहि गेल। 3 दिसंबर 2023 क' हमर जेठ बालक चिरंजीवी दर्शकेँ जन्मदिन मना राति 10:30 बजे करीब घर सँ बिदा भेलहुँ पुनः रोजी रोटी लेल तंजानिया आ ससमय पहुँचलहुँ दिल्लीक इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ।सब सुरक्षा जाँच इत्यादिक बाद नियत जगह जा बैसलहुँ। समयोपरांत जहाजमे बैसलहुँ, जहाज उड़ल, वातावरण सामान्य भेल। तखन निकाललहुँ -- 'मोनक चान सुरुज'

स्वभाविक रूपें पोथीक भूमिका पढ़ल आ तखन देखैत छी जे पोथीक भूमिका सेहओ हमर सबहक प्रिय आदरणीय डॉ. कैलाश कुमार मिश्र निवासी अड़ेर, मधुबनीक हमर गामक पड़ोसी थिकाह। भूमिकामे डॉ. कैलाश जी स्वयं स्पष्ट करैत छथि जे हमरा सनक सामान्य लोक लेल हिनकर रचना पर किछु लिखब केर अर्थ भेल अनन्त प्रकाश सँ भरल सुरुजकेँ दीप देखाएब। तहन हमरा सनक अधना कोन दीप जरायत ? ओ फेर लिखैत छथि जे इ पोथी 'मोनक चान सुरुज' लेखिकाकेँ केर आत्मकथा अथवा जीवनक संस्मरणक तीन कड़ीक अंतिम कड़ी छन्हि। पूर्वक दू गोट प्रकाशित आत्मकथाक नाम 'किस्त-किस्त जीवन' आ 'आखर -आखर प्रीत' छन्हि। एकर अतिरिक्त ओना तँ आर पोथी सब प्रकाशित छन्हि।

                      हिनका द्वारा लिखल भूमिका सँ पाठककेँ लेखिकाक विषयमे बुझब ओ गुणब सहजें भ' जेतन्हि आ आगाँक कथा रुचिसँ पढताह/ पढतीह। लेखिका सेहओ अपन दुई शब्दक अंतर्गत लिखैत छथि-- हमर मोनक यात्रा कोना क्षणहिमे कोसो कोस घुमि अबैत अछि------ई सब निरूपित अछि एहि पोथीमे। तैं एकर नाम राखल अछि ' मोनक चान सुरुज'। कहैत छथि-------मनुखक भाग्य  जकाँ पोथीक सेहओ भाग्य होइत छैक। पोथी जहन हाथ लेब, पढ़' लेल बैसब तँ इ हमर विश्वास थिक जे अवश्य बिना पूरा पढ़ने नञि छोड़ब। हम एकटा पाठकक रूपें एहि शब्दकेँ पूर्णतः समर्थन करैत छी। हमरा संग ठीके एहन भेल जखन पढ़बाक क्रममे एलहुँ तँ क्रमशः पोथी पढ़ि सम्पूर्ण कएल ताहिमे कतौ कोनो संदेह नञि।

      ओना तँ फेर कहैत छी जे डॉ. कैलाश जीक भूमिका ततेक ने साधल ढंग सँ लिखल गेल अछि हमरा किछु लिखबा लेल भेटिए नञि रहल अछि।

लेखिकाक अपनहि जीवन संगी ललन वर्मा जी लिखैत छथि -- एक दिस प्रेम, करुणा दया आ सहजहिं पसिझय बाली शेफालिका आ दोसर दिस क्रांतिकारी शेफालिका दुनू व्यक्तित्वक रस्सा - कस्सीमे बढ़ैत सहित्यधर्मी शेफालिका स्वतः एक अद्भुत व्यक्तित्वक स्वामिनी बनि गेल छथि जे बुझबामे कखनहुँ हम सेहो अपनाकेँ अक्षम पबैत छी। साहित्य सृजन लेल हुनका प्रयास नञि करए पड़ैत छन्हि साहित्य ओहिना हुनका सँ बहराइत छन्हि जेना शिवजीक जटा जूटसँ गंगा स्वतः बहरा क' अबाध गति सँ कल्याण लेल प्रबाहमान थीकिह। एहने थीकिह डॉ. शेफालिका अपन पतिक दृष्टिमे।

एहि पोथीक दोसर भूमिकाक मध्य चंद्रेश जी लिखैत छथि--- हिनका साहित्यक प्रति अगाध आस्था आ रचनामे अभिव्यक्ति करबाक समर्पण भाव अछि। अथाह वेदना,पीड़ा,करुणा आदिक संग हिनक रचनामे सामाजिक कुव्यवस्थाक प्रति जे विद्रोहक स्वर अछि आओर ओ जे खुजिक' सत्यानुभूतिमे बात विचार प्रकट कएलन्हि अछि सैह हिनका मीरा बनबैत छन्हि। चंद्रेश जी पुनः कहैत छथि---- ओ स्वयं हँसैत छथि आ जन - जनकेँ हसब' चाहैत छथि आ खिल - खिलाइत समाजकेँ देख' चाहैत छथि। स्त्री विरोधी मानसिकताक वैश्विक रोगकेँ हटबैत, जन-जनमे प्रेम- भाव भरैत, नवचेतनाक अभ्युदयमे जनसरोकारक प्रति प्रतिबद्धता रखैत ओ स्वस्थ समाजक निर्माण हेतु भूमिका एहि पोथीक मादे निमाहलानि अछि से अनुपम धरोहर थिक।

एहि पोथीक पहिल पड़ाव अछि 'मिथिला धाम सँ कश्मीर धरि' सच कही तँ एहि कथाकेँ पढ़ब हम तखन प्रारम्भ केने छलहुँ जखन दिल्ली सँ तंजानिया क मध्य हवाई जहाजमे छलहुँ। आ से एकरतियो इ नञि अनुभव भेल जे धरती छोड़ि आकाश मार्ग सँ कतौ जा रहल छी। एकदम जेना हम कखनो मिथिला आ श्रीनगर तँ कौखन कश्मीर। कौखन होटलमे तँ कौखन बाग बगीचा इत्यादिमे हमहुँ फोटो खिचेबाक एकटा हिस्सा छी। एना लगैत छल जेना हमहुँ हुनका संग थाकि हुनके लग बैस गेल छी। एखन धरि हमरा जम्मू-कश्मीर दिस जएबाक अवसर नञि भेल अछि मुदा एना लगैत अछि जेना बिन गेनहि घुमि एलौं। एहि कथानान्तर्गत बेसी की कहु - एतबे कहब बिन गए गेने कश्मीर घुमबाक हो तँ इ पोथीक संस्मरण पढ़ी।

एहि क्रममे दोसर पड़ाव थिक ' पुरान टिहरिक दर्द देखल - भोगल' एहि कथाक मध्य हम एतबे अनुभव कएल जे शारीरिक रूपें लेखिका तँ टिहरीक भ्रमण क' रहल छथि मुदा हुनका कोसीक देखल भोगल दर्द बेर-बेर टिभकी उठैत छन्हि।

       मुख्यतया पंद्रहटा कथाक एहि पोथीक मध्य अछि। एक - एकटा संस्मरण पढ़बा काल ध्यान किन्नहुँ नञि एमहर - ओमहर हएत से हमरा विश्वास अछि। प्रत्येक कथा अनेक रस सँ पाटल अछि, कौखन हँसब, कौखन कानब, आ की कौखन विस्मृत भ' जाएब से कहब कठिन अछि।  एहि पोथीकेँ पढ़लाक बाद स्वयं पाठककेँ बुझबामे आबि जएतन्हि जे की कारण थिक जे डॉ. शेफालिका वर्माकेँ मैथिलीक महादेवी वर्मा आ हिनक पाठक हिनका मातृतुल्य आदर करैत छन्हि। हिनका लेल एतबे कहब जे ----

भावनाकेँ शब्दमे पिरोबाक
गद्य की पद्यमे सहजें रखबाक

मोनक बातकेँ मोनमे नहि
साहित्य गढ़ी लोकमे परोसबाक

जे भेटल तकरामे तकरेसन
अनुकूल स्नेह बाँटबाक

व्यवहारानुकूल सर्वत्र सँ
लोकक स्नेह प्राप्त करबाक

ककरो माय ककरो दीदी
सहजे बनिजायबाक 

आ ककरो भाय त ककरो बेटा सन
प्रेम बँटबाक, भाव बँटबाक

इ सब क्षमता
सामान्यमे कहाँ संभव छैक
मुदा हमरा नजरिमे छथिन - आदरणीया शेफालिका वर्मा 

 

संजय झा 'नागदह'


प्रकाशित : मिथिलांगन, ओक्टुबर 2023 - मार्च 2024 

मंगलवार, 5 अगस्त 2025

समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा

  आज मेरे पास एक अद्वितीय पुस्तक आई है—*समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा* (मैथिली संस्करण), जिसे संकलित किया है श्रीमती कुमकुम झा एवं श्री राज...

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