SANJAY JHA 'NAGDAH' / संजय झा 'नागदह'

गुरुवार, 7 अगस्त 2025

बीहनि कथा - चुप्प नै रहल भेल ?

रातुक बारह बजे कनियां सं फोन पर बतियाइत छत पर गेलौं कि देखैत छी आगि लागल। जोर सं हल्ला कैल हौ तेजन हौ तेजन रौ हेमन .. अपन पित्तियौत भैयारी सेहो अपन छत पर छल ओहो हल्ला केलक । सभ उठल कोनो ना आगि मिझाएल । भोरे जहन गाम दिस गेनौ तं एक गोटे कहै छथि .... अहीकें रातिमे धरफरी छल, कने काल चुप्प नै रहल भेल !

@ संजय झा 'नागदह'

संस्मरण ओ समीक्षा - मोनक चान सुरुज

डॉ. शेफालिका वर्मा, इ नाम साधारण नाम नहि थिक। मिथिलावासीक मध्य नञि जानि कतेकोकेँ दीदी, चाची, काकी, आ मातृस्वरूपा छथि। हिनका लोक मैथिलीक 'महादेवी वर्मा' कहि गौरवान्वित होइत अछि। हिनका हृदयमे स्नेहक समुद्र अछि जाहिमे जे चाहै जेना चाहै डुबकी लगाबय की ओहिठाम बैस मनोवृत्तिक अनुकूल स्नेहाशीष प्राप्त करै।

    हम प्रयास मात्र क' रहल छी जे अपन उद्गार, अनुभव कोना व्यक्त कएने छथि एहि पोथी 'मोनक चान सुरुज'क संस्मरणात्मक कथामे।

हमर अनुभव की ज्ञान एतेक की अंशो मात्र नहि जे समभाव राखि सकब। समयक अभाव तँ स्वाभाविके भ' गेल अछि। पोथीक उपलब्धता अमेज़ॉन पर रहबाक कारणें ऑनलाइन खरीद मंगबेलहुँ, जे जखन दिल्ली जाएब तँ समय निकालि पढ़ब। से जे से पोथी दिल्ली निवास स्थान पहुंच गेल। समय बीतल आ सोह धरि नञि रहल जे कोनो पोथियो पठउने छी सबटा बिसरा गेल छल। नोकरी-चाकरीक मध्य कतेको बातक सोह खासक' निजी जिनकीक हमरा जनैत कतेको लोककेँ नहि रहैत हेतन्हि, सैह हमरो भेल।

                   दिल्ली पहुँचलाक बाद अचानक एक दिन (बेबी) कनियाँ कहैत छथि जे हे लिअ अपन समान जे आहाँ ऑनलाइन अपना लेल पठौने छी। ओहीमे सँ निकलल 'मोनक चान सुरुज' आ देखितहिं मोनमे भेल जे कखन पढ़ब ! जकर मुख्य कारण छल आदरणीया मातृस्वरूपा डॉ. शेफालिका वर्मा जिनकर नित्यहिं आशीर्वाद हमरा व्हाट्सएपक माध्यमसँ भेटैत रहैत अछि।

खैर जे से तखनो समयक अभावे छल। तंजानिया सँ किछु दिनक लेल जखन छुट्टी पर भारत जाइत छी तँ कने आर वयस्तता बढ़ले रहैत अछि। इ काज, ओ काज, नाना प्रकारक काज, भेंट - घांट इत्यादि। मुदा चोट्टहिं पोथीकेँ लैपटॉप बैगमे राखि लेलहुँ जाहिसँ बिसरि नञि कम सँ कम संग चलिजाए। आ से नीके कएल, पोथी छुटबाक कोनो चारा नञि रहि गेल। 3 दिसंबर 2023 क' हमर जेठ बालक चिरंजीवी दर्शकेँ जन्मदिन मना राति 10:30 बजे करीब घर सँ बिदा भेलहुँ पुनः रोजी रोटी लेल तंजानिया आ ससमय पहुँचलहुँ दिल्लीक इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ।सब सुरक्षा जाँच इत्यादिक बाद नियत जगह जा बैसलहुँ। समयोपरांत जहाजमे बैसलहुँ, जहाज उड़ल, वातावरण सामान्य भेल। तखन निकाललहुँ -- 'मोनक चान सुरुज'

स्वभाविक रूपें पोथीक भूमिका पढ़ल आ तखन देखैत छी जे पोथीक भूमिका सेहओ हमर सबहक प्रिय आदरणीय डॉ. कैलाश कुमार मिश्र निवासी अड़ेर, मधुबनीक हमर गामक पड़ोसी थिकाह। भूमिकामे डॉ. कैलाश जी स्वयं स्पष्ट करैत छथि जे हमरा सनक सामान्य लोक लेल हिनकर रचना पर किछु लिखब केर अर्थ भेल अनन्त प्रकाश सँ भरल सुरुजकेँ दीप देखाएब। तहन हमरा सनक अधना कोन दीप जरायत ? ओ फेर लिखैत छथि जे इ पोथी 'मोनक चान सुरुज' लेखिकाकेँ केर आत्मकथा अथवा जीवनक संस्मरणक तीन कड़ीक अंतिम कड़ी छन्हि। पूर्वक दू गोट प्रकाशित आत्मकथाक नाम 'किस्त-किस्त जीवन' आ 'आखर -आखर प्रीत' छन्हि। एकर अतिरिक्त ओना तँ आर पोथी सब प्रकाशित छन्हि।

                      हिनका द्वारा लिखल भूमिका सँ पाठककेँ लेखिकाक विषयमे बुझब ओ गुणब सहजें भ' जेतन्हि आ आगाँक कथा रुचिसँ पढताह/ पढतीह। लेखिका सेहओ अपन दुई शब्दक अंतर्गत लिखैत छथि-- हमर मोनक यात्रा कोना क्षणहिमे कोसो कोस घुमि अबैत अछि------ई सब निरूपित अछि एहि पोथीमे। तैं एकर नाम राखल अछि ' मोनक चान सुरुज'। कहैत छथि-------मनुखक भाग्य  जकाँ पोथीक सेहओ भाग्य होइत छैक। पोथी जहन हाथ लेब, पढ़' लेल बैसब तँ इ हमर विश्वास थिक जे अवश्य बिना पूरा पढ़ने नञि छोड़ब। हम एकटा पाठकक रूपें एहि शब्दकेँ पूर्णतः समर्थन करैत छी। हमरा संग ठीके एहन भेल जखन पढ़बाक क्रममे एलहुँ तँ क्रमशः पोथी पढ़ि सम्पूर्ण कएल ताहिमे कतौ कोनो संदेह नञि।

      ओना तँ फेर कहैत छी जे डॉ. कैलाश जीक भूमिका ततेक ने साधल ढंग सँ लिखल गेल अछि हमरा किछु लिखबा लेल भेटिए नञि रहल अछि।

लेखिकाक अपनहि जीवन संगी ललन वर्मा जी लिखैत छथि -- एक दिस प्रेम, करुणा दया आ सहजहिं पसिझय बाली शेफालिका आ दोसर दिस क्रांतिकारी शेफालिका दुनू व्यक्तित्वक रस्सा - कस्सीमे बढ़ैत सहित्यधर्मी शेफालिका स्वतः एक अद्भुत व्यक्तित्वक स्वामिनी बनि गेल छथि जे बुझबामे कखनहुँ हम सेहो अपनाकेँ अक्षम पबैत छी। साहित्य सृजन लेल हुनका प्रयास नञि करए पड़ैत छन्हि साहित्य ओहिना हुनका सँ बहराइत छन्हि जेना शिवजीक जटा जूटसँ गंगा स्वतः बहरा क' अबाध गति सँ कल्याण लेल प्रबाहमान थीकिह। एहने थीकिह डॉ. शेफालिका अपन पतिक दृष्टिमे।

एहि पोथीक दोसर भूमिकाक मध्य चंद्रेश जी लिखैत छथि--- हिनका साहित्यक प्रति अगाध आस्था आ रचनामे अभिव्यक्ति करबाक समर्पण भाव अछि। अथाह वेदना,पीड़ा,करुणा आदिक संग हिनक रचनामे सामाजिक कुव्यवस्थाक प्रति जे विद्रोहक स्वर अछि आओर ओ जे खुजिक' सत्यानुभूतिमे बात विचार प्रकट कएलन्हि अछि सैह हिनका मीरा बनबैत छन्हि। चंद्रेश जी पुनः कहैत छथि---- ओ स्वयं हँसैत छथि आ जन - जनकेँ हसब' चाहैत छथि आ खिल - खिलाइत समाजकेँ देख' चाहैत छथि। स्त्री विरोधी मानसिकताक वैश्विक रोगकेँ हटबैत, जन-जनमे प्रेम- भाव भरैत, नवचेतनाक अभ्युदयमे जनसरोकारक प्रति प्रतिबद्धता रखैत ओ स्वस्थ समाजक निर्माण हेतु भूमिका एहि पोथीक मादे निमाहलानि अछि से अनुपम धरोहर थिक।

एहि पोथीक पहिल पड़ाव अछि 'मिथिला धाम सँ कश्मीर धरि' सच कही तँ एहि कथाकेँ पढ़ब हम तखन प्रारम्भ केने छलहुँ जखन दिल्ली सँ तंजानिया क मध्य हवाई जहाजमे छलहुँ। आ से एकरतियो इ नञि अनुभव भेल जे धरती छोड़ि आकाश मार्ग सँ कतौ जा रहल छी। एकदम जेना हम कखनो मिथिला आ श्रीनगर तँ कौखन कश्मीर। कौखन होटलमे तँ कौखन बाग बगीचा इत्यादिमे हमहुँ फोटो खिचेबाक एकटा हिस्सा छी। एना लगैत छल जेना हमहुँ हुनका संग थाकि हुनके लग बैस गेल छी। एखन धरि हमरा जम्मू-कश्मीर दिस जएबाक अवसर नञि भेल अछि मुदा एना लगैत अछि जेना बिन गेनहि घुमि एलौं। एहि कथानान्तर्गत बेसी की कहु - एतबे कहब बिन गए गेने कश्मीर घुमबाक हो तँ इ पोथीक संस्मरण पढ़ी।

एहि क्रममे दोसर पड़ाव थिक ' पुरान टिहरिक दर्द देखल - भोगल' एहि कथाक मध्य हम एतबे अनुभव कएल जे शारीरिक रूपें लेखिका तँ टिहरीक भ्रमण क' रहल छथि मुदा हुनका कोसीक देखल भोगल दर्द बेर-बेर टिभकी उठैत छन्हि।

       मुख्यतया पंद्रहटा कथाक एहि पोथीक मध्य अछि। एक - एकटा संस्मरण पढ़बा काल ध्यान किन्नहुँ नञि एमहर - ओमहर हएत से हमरा विश्वास अछि। प्रत्येक कथा अनेक रस सँ पाटल अछि, कौखन हँसब, कौखन कानब, आ की कौखन विस्मृत भ' जाएब से कहब कठिन अछि।  एहि पोथीकेँ पढ़लाक बाद स्वयं पाठककेँ बुझबामे आबि जएतन्हि जे की कारण थिक जे डॉ. शेफालिका वर्माकेँ मैथिलीक महादेवी वर्मा आ हिनक पाठक हिनका मातृतुल्य आदर करैत छन्हि। हिनका लेल एतबे कहब जे ----

भावनाकेँ शब्दमे पिरोबाक
गद्य की पद्यमे सहजें रखबाक

मोनक बातकेँ मोनमे नहि
साहित्य गढ़ी लोकमे परोसबाक

जे भेटल तकरामे तकरेसन
अनुकूल स्नेह बाँटबाक

व्यवहारानुकूल सर्वत्र सँ
लोकक स्नेह प्राप्त करबाक

ककरो माय ककरो दीदी
सहजे बनिजायबाक 

आ ककरो भाय त ककरो बेटा सन
प्रेम बँटबाक, भाव बँटबाक

इ सब क्षमता
सामान्यमे कहाँ संभव छैक
मुदा हमरा नजरिमे छथिन - आदरणीया शेफालिका वर्मा 

 

संजय झा 'नागदह'


प्रकाशित : मिथिलांगन, ओक्टुबर 2023 - मार्च 2024 

मंगलवार, 5 अगस्त 2025

सोमवार, 4 अगस्त 2025

वरियातीमे भेल वैष्णव धर्म भंग

मिथिलाक एकटा प्राचीन, सांस्कृतिक धरोहर सँ भरल पुरल गाम—जाहिठाम आइयो  परंपरा ओहिना जीवित अछि, जेना पुरखा लोकनिक समयमे। एहि गाममे रहैत छलाह ठाकुर बाबा—एकटा अत्यंत सम्माननीय व्यक्तित्व। वैष्णव, विद्वान, ओ सुच्चा भगवती भक्त, जेना साक्षात् धर्म आ श्रद्धाक मूर्त रूप होथि। ठाकुर बाबा मात्र एकटा आध्यात्मिक पुरुष नहि, बल्कि गामक जनमानसक चिकित्सक सेहो छलाह। कोनो डिग्री नहि, मुदा यन्त्र-मंत्र आ आयुर्वेदमे ओत-प्रोत ज्ञान। ओ परसौती (प्रसूति), बाल चिकित्सा आ लोक-विज्ञानक अद्भुत जानकार छलाह। गाम-जे-गाम लोक हुनका देखिते शरणागत भ' जाइत छल।
ओ अपन प्रशंसा कदापि नहि करैत छलाह—ने शब्दे, ने भावे। मुदा ओतबे विनम्रता संग सामाजिक आस्थाकें निभाबैत छलाह। कतौ जेबाक आग्रह होइन्ह, त' प्रायः मना करैत छलाह, मुदा विशेष परिस्थितिमे, खास क' अपन मित्रक, समाजसेवीक प्रेमवश, ओ डेग उठा लैत छलाह।

              थिक हुनकर विद्वता संक्षिप्त परिचय। कि कहु ठाकुर बाबाकें  हाल-- किछुए दिन भेल अछि बाबाकेँ एकटा गामक संगीक  बेटाक विवाह कतेक  ठाम ठीक - ठाक  भेलाक बादो टुटिगेलाक उपरांत कोनोना दुचारीटा आँखि बन्न कय तय भेल तदोपरांत ठाकुर बाबाकेँ अपन संगी सँ अत्यधिक लगाव विश्वास ताहिमे कनमो मात्र संदेह नहि जोर शोर सँ होमय लागल विवाहक तैयारी. आवी गेल दिन जाहिदिनक सिद्धांत तय भेल छल। विवाह होमय वास्ते एकटा नीक होटलक व्यवस्था कन्यागत केने छलाह कदाचिद कन्यागतकेँ कहलगेल हो जे वरियातीमे बहुत साभ्रान्त वर्गक लोक  रहताह तैं  उत्तम कोटिक व्यवस्था भेनाई अनिवार्य अछि

परम मित्र—जे स्वयं वैष्णव छलाह—किंतु समाजक विभिन्न वर्गक संबंधवश साकट, शाक्त, आ अन्य लोकनिकेँ सेहो आमंत्रण देल गेल। ठाकुर बाबा चिंतित छलाह, जे एहन विवाहमे वैष्णव लोकनिक धर्मसंकट भ' सकैत अछि—विशेष रूपेण भोज्यपदार्थक कारण।

ठाकुर बाबा बहुत प्रयास केलाह, आग्रह केलनि, जे वैष्णव लोकनिकेँ स्पष्ट रूपेण अलग व्यवस्था हो, जइमे प्याज, लहसुन, मांसादिक निषेध सुनिश्चित होइक। वरियातिकें वचन देल गेल—"चिंता जूनि करू, वैष्णव-शाक्त सब लेल अलग व्यवस्था रहत। हमहुँ वैष्णव छी।"ठाकुर बाबा विश्वस्त भेलाह। संगहि, कुछ आर वैष्णव लोकनि सेहो आमंत्रण स्वीकार केलन्हि। 

विवाहक दिन आयल। वरियाती सजल, गाम सँ दूर शहरमे वरियाती जयबाक लेल जाहिअनुकूल व्यवस्था छल, ताहि अनुकूल वरियाती लोकनि एकत्रित भेलाक उपरांत,यथाकथित गाडीमे स्थान ' बैस गेलाह बस - गाडी फूजल शहरक ओहि होटल पर पहुँचल जाहिठाम वरियातिक स्वागतक व्यवस्था छल सब वरियाती लोकनि व्यवस्था देखि अत्यधिक प्रसन्न छलाह कदाचित ठाकुर बाबा जहिनाकें तहिना कारन हुनका पर सुख दुःख बेसी असर नहि पड़ैत छन्हि यो - काल्हिक मॉडर्न समयमे मिथिलाक लोककेँ, मिथिलामे, होटलमे एहन स्वागतक इंतजाम प्रायः कम्मे - सम्मे हाथ लगैत छनि एही कारने बच्चा, नवयुवक, वुजुर्ग लोकनि सेहो बेसी उत्साहित छलाह  सब गोटा होटलमे सजाओल कुर्सी टेबल पर अपन -अपन स्थान पकड़लन्हि मुदा वैष्णव लोकनिकेँ थोड़ेक आश्चर्य लगलन्हि जे कतहु एहन तरहक सूचना - पटल नहि देखवामे आवी रहल अछि, जे कतय बैसताह साकट / शाक्त  कतय वैष्णव वैष्णव लोकनि अपना में विचार - विमर्श कय एक - कात ' सबगोटा बैसलाह सूचित कय देल गेल जे एमहर वैष्णव लोकनि बैसल छथि तैं माँछ,मांस,प्याज लहसून इत्यादिक व्यवहार सँ परहेज कयल जेबाक चाही बड्ड बेस, मुदा होटलमे जखन एक -आधटा  बारीक रहै तखन ने ? कियो बुझलक कियो नहि   

         शुरू भेल इत्र,पुष्प जल ठंढाई सँ स्वागत, एक पर एक चलैत रहल आयल पकौड़ाक बेड़ जाहिमे छल आलू ,गोबी, बैगन, सजमनि आर बहुत रास व्यंजन सब वैष्णव लोकनिकेँ सेहो परसल गेल आखिर हुनको सबकें खेबा योग्य व्यंजन थिक खूब चावसँ  वैष्णव लोकनि सेहो ग्रहण केलाह पूर्ण रूप सँ संतुष्ट छलाह जे एक कोन देने छी संगहि प्रबंधक  वारिक लोकनिकेँ सूचना छन्हियेंएहिठाम वैष्णव वर्गक लोक बैसल छथि तैं धर्म संकट कोनो बाते नहि मुदा अहिना क्रममे, एकटा बारीकक गलतीक कारने —ओहिमे प्याज आ किमा (मांस) सँ बनल पकौड़ा सेहो एक संग परोसाए लागल।

वैष्णव लोकनिक पकौड़ा खेबाक गति चरम सीमा पर छल ऐना बुझु जेना ट्रैनमे राजधानी शताव्दी ओहि क्रममे वैष्णव लोकनि जिनका प्याज लहसून सँ सेहो परहेज छलनी प्याज किमाक पकौड़ा खूब ठाठसँ खेलाह दु- चारिटा पकौड़ा जखन पेटक कोनो कोनमे चली गेल

 तखन जे पकौड़ाक स्वाद अद्भुत छल से बुझबाक जिज्ञासा जागल आखिर  इ अछि कि ? नज़री गारल गेल पकौड़ा हाथमे लय (पकौड़ाक टुकड़ा तोड़ैत) बकुलाक नज़री सँ देख रहल छलाह कि तावतमे दोसर वैष्णव (नाग सांप जँका फनकार मारैत उठलाह) हे देखु ... महात्मा जी  इ  प्याजक पकौड़ा थिक दोसर गोटा (एक गोट वारिक के हाथ पकड़ि पुछलाह) वाऊ कहु जे एहीमे कथि-कथिक पकौड़ा अछि बारीक़ एक - एकटा पकौड़ा चिन्हाबैत कहलाह - इ थिक आलूक,गोबिक ,बैगनक इत्यादि थिक प्याज जे बड़ी जँका अछि से थिक किमाक पकौड़ा  

ठाकुर बाबा अपना आपकेँ वैष्णव व्रत खंडित भेलाक उपरान्तो क्रोध पर नियंत्रित उल्टी करैत तत्क्षण कुर्सी छोएर होटलसँ  बहरेलाह राम राम कोन कर्मक दोष छल जे एहिठाम वरियाती अयलहुँ संग देलखिन संग आयल वैष्णव लोकनि   वैष्णव वर्गक वरियातीमे  कियो नाग सांप जँका फुफकार  छोड़ैत छलाह कियो छुब्ध छलाह जे कि भेल ?

ठाकुर बाबा दुर्दशा बर्दाश्त नहि  क' सकला (शांत स्वरमे मुदा पीड़ित चेहरा) धर्म खंडित भ' गेल। (माथ झुकबैत बाहर निकललाह)  (अपन क्रोधकेँ संयमित करैत) ओहिठाम भोजन नहि अपितु सप्पत खेलाह, पुनः जीवन पर्यन्त कतहुँ आन ठाम अन्न ग्रहण नहि करब वरियातिक कोन बात ! वरियातीमे भेल वैष्णव धर्म भंग ! ठाकुर बाबाक सत्कर्म निष्ठां के नहि जनैत अछि   बात सुनि पूरा गामक लोक जे सुनलक से सब खूब निंदा करय लागल जे कहु ऐनामे कियो ककरो वरियाती या आन - जान केना करत ?  

गाम आबि मित्र कहलन्हि - हम सब दोषी छी। अहाँक प्रतिष्ठा आ आत्मा दू-रास्ता पर ठाढ़ भ' गेल। ठाकुर बाबा: (मंद स्वरमे) धर्मक रक्षा लेल दुख सहब पड़ैत अछि। मुदा सत्य सँ डगमगाएब हम वैष्णवक लक्षण नञि। एखनो समाज जौं चेति जाए तँ ---------(एतेक कहैत मौन भ' गेलाह)

अस्तु

 

संजय झा "नागदह"

दिनाक : १४/१२/२०१३ - देल्ही


प्रकाशित : मिथिलांचल टुडे, 2013 


सब समाज सँ  विनम्र निवेदन अछि जे समाज एहि काल्पनिक घटनासँ  सिख लैथ  भविष्यमे एहन तरहक घटना नहि हो ताहि पर ध्यान राखथि।

 


बीहनि कथा - चुप्प नै रहल भेल ?

रातुक बारह बजे कनियां सं फोन पर बतियाइत छत पर गेलौं कि देखैत छी आगि लागल। जोर सं हल्ला कैल हौ तेजन हौ तेजन रौ हेमन .. अपन पित्तियौत भैयारी स...

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