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सोमवार, 8 सितंबर 2025

चरिपतिया - गारता ओत्तहि खुट्टा


सबटा बात उचिते कहता, 
जूनि करू, मन खट्टा ।
मैथिल विज्ञ मित्र जौं चाही,
सम्हरि रहु, गारता ओत्तहि खुट्टा।

@संजय झा 'नागदह' 

मंगलवार, 5 अगस्त 2025

शुक्रवार, 1 अगस्त 2025

चरिपतिया

चेतन अवस्था मे रहितहुँ
चेतनासँ दूर मनुक्ख
जीवन भरि अचेते
अवस्था मे रहैत अछि।

@संजय झा 'नागदह' 

02-Jan-2020

शनिवार, 16 जनवरी 2016

चारिपतिया - बुझि अप्पन आ हम्मर आन



बुझि अप्पन आ हम्मर आन 
छोड़ि रहल छल ढ़ाकीक - ढ़ाकी 
झुठक सरबत बाँटि रहल छल 
लाखों लोक लग पाँति - पाँति। 

संजय झा "नागदह"
दिनांक :01/12/2015

चरिपतिया

1.
करू ओकरा कात भाई 
बड्ड चलबैत अछि थोंथि 
भनें लिखलक ओ
नाम सँ तँ अछि हमरे पोथी ।

-----संजय झा "नागदह" 11/08/2015

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2. ककरा करू फज्झति 
ककरा सँ कलह बेसाहु
घुमि रहल अछि काल चक्र 
एहि मूढ़कें, किछु दिन आर बिसारु


------------संजय झा "नागदह" 08/07/2015

*************************************************3. अमावश्या राति सन मुंह हुनक 
द्वितिया चान सन दांत 
बाजब यदि सुनि लेलहुँ हुनकर
त' करिते रहि जायब बात 

-------------संजय झा "नागदह "   18/05/15
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4. सन - सन बहय बसात
उड़िया रहल अछि, चुनरी हुनकर
छौड़ा सब भेल बताह 
हुनका लेखे धनो धन सन

---------संजय झा "नागदह "  17/05/15
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5. उपटि गेल खड़हाउड़ 
नहि बांचल खरही
कुश उत्पाटनक विधि
की भS रहल घरही -घरही ?
-------- संजय झा " नागदह"

Date - 20/12/2015

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6. देह निष्प्राण दिल्ली पड़ल अछि
प्राण त नागदहक गामे रहल अछि
इ गामक नेह देखाबी हम ककरा
निष्प्राण देहक मोले की रहैत अछि।

-------- संजय झा " नागदह"

Date - 14/12/2015

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7. विद्यापति पर्व
सब टाङ्गि रहल हुनक छायाचित्र
हम कहु कोना इ बात विचित्र
कहता कS रहलहुं विद्यापति पर्व
नहि रहैत अछि कनिऒ सन्दर्भ।


----------संजय झा "नागदह"
Date - 07/12/2015

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8. एक्का दुक्का मतलबी 
बाँकी के की भेटत ?
टीनक चश्मा पहिरा 
वोट अपन बटोरत। 

----- संजय झा "नागदह "
Date : 06/10/2015

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9. बुझि रहल नहि दाइ - माइ 
गली - गली घुमि रहल कसाई
ककरा कहबै के सुनत भाइ 
चहुँ दिस घेंटकट्टा अछि आइ। 
 


संजय झा "नागदह "
Date : 06/10/2015

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10.

सुरुये सँ परिवारवाद 
लगा देने अछि घुन 
कुकुर - बिलारिक चक्करमे
जनता बहा रहल अछि खून। 
संजय झा "नागदह "
Date : 06/10/2015

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11.
मनवा में रहे उमंग सदा तोहरा के,
बनल रहे इहे देह - नेह तोहरा के, 
जब ले कपार पर रही हाथ माई के, 
केहू ना कुछ बिगाड़ सकी तोहरा के ।

संजय झा "नागदह" 19/08/2015


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  आज मेरे पास एक अद्वितीय पुस्तक आई है—*समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा* (मैथिली संस्करण), जिसे संकलित किया है श्रीमती कुमकुम झा एवं श्री राज...

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