शनिवार, 16 जनवरी 2016

विद्यापति स्मृति पर्व समारोह मनाओल गेल लाल बाग , लोनी , गाज़ियाबाद में

०१ अक्टूबर २०१३ क मिथिला सेवा समिति द्वारा विद्यापति पर्व समारोह खूब धूमधाम सँ लाल बाग लोनी ,गाज़ियाबाद में मनाओल गेल जाहि के मुख्य अतिथि छलाह श्री मान राज नाथ सिंह जी , भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष , मुदा अतिआवश्यक कार्य के कारण ओ कलकत्ता चलि गेल छलाह ,  ताहि कारने ओ उपस्थित नहिभ सकलाह किछु अतिथि राजनितिक गर्म माहौल के कारन सेहो उपस्थित नहि भ सकलाह सब कियो एकाएक व्यस्त भ गेल छलाह परन्तु श्री मान मनोज धामा जी- भाजपा , अध्यक्ष नगर पालिका परिषद्  लोनी ,गाज़ियाबाद अपन पूर्ण साम- दामक संग पधारि  ई समारोह में उपस्थित भेलाह आ अन्य आमंत्रित अतिथि सेहो संगहि दिल्लीक समस्त जानल - बुझल संस्था सँ जुड़ल पदाधिकारी एवं सदस्य लोकनि आमंत्रित छलाह , ओहि में सब संस्थाक अध्यक्ष व प्रतिनिधि लोकनि के मिथिला सेवा समिति द्वारा ख़ूब मोन सँ  यथा साध्य यथा संभव माला, पाग , चादर आ स्मृति चिन्ह दय सुस्वागत कयल गेलन्हि जाहि में मिथिलावासी सोसाइटी,डी. एल. एफ. अंकुर विहार, लोनी , गाजियाबाद  कें अध्यक्ष श्री सुभाष कुमार झा व संस्थापक - सह महासचिव श्री संजय कुमार झाक विचार - विमर्शक संग - संग अन्य सहयोग पुरजोर रहन्हि एहि  विद्यापति पर्व समारोहक अति विशिष्ट अतिथि छलाह डॉ श्री उमाकांत झा सेवा निवृत व्याख्याता मैथिली विभाग - एम. एल . एस .एम कॉलेज दरभंगा बहुत भाग्यक बात छल जे हमरा श्री मान रत्नेश्वर झा जीक द्वारा हुनक श्रोत भेटल नहि त ई मंच मैथिलिक विद्वान सँ सुशोभित नहि भ सकैत , श्री उमाकांत झा मंचक दीप प्रज्वलित कय मंच कें प्रकाशित आ गरिमामय  बनौलन्हि आ संग देलखिन्ह श्री मनोज धामा जी व अन्य आमंत्रित अतिथि हम श्री विजय झा जी कें बड्ड आभार व्यक्त करैत छियन्हि जे ओ डॉ श्री उमाकान्त झा जी के अपना संगे आनि आ ल जयबामे में हमर मदद केलन्हि , कारन डॉ उमा बाबू बयोब्रिद्ध भ चुकल छथि, श्री विजय जी जन जागृत मंच आ मिथिला राज्य निर्माण सेना सँ सेहो जुड़ल छथि डॉ उमाकान्त जी मैथिलीक चारि गोट पोथी  प्रकाशित छन्हि हुनक चर्चा हम पहिनहु स्व० डॉ सुभद्र झाक लिखल पोथी  नातिक पत्रक उत्तर में देख चुकल छि ,हुनक स्वभाव केरा पातक करवीर जकां सौम्य छनि, ई मंच हुनक स्नेह आ शुभाशीष सँ गद - गद भ गेल हुनक एकटा बात समस्त मैथिल जन कें ध्यान रखबायोग्य अछि जे मंचक अध्यक्ष कखनो मंच नहि छोरथि जाहि सँ मंचक हालात मज़बूत रहैत अछि आ दोसर एहन तरहक सम्मानित स्मृति पर्व समारोहक कार्यक्रम में जूता -चप्पल पहिर मंच पर चढ़नाई कठोर रूप सँ वर्जित हेबाक चाहि
आब हम किछु चर्चा करय चाहब विद्यापतिजीक सम्बन्ध में –
विद्यापति पर्व समारोह प्रायः मैथिलक संस्था समुदाय के माध्यम सँ कातिक मासक मध्य आकि आस-पास मनाओल जाइत अछि कारण हुनक देहावसान के सम्बन्ध में एकटा पद एहि तरहे प्रचलित अछि -
विद्यापतिक आयु अवसान
कातिक धवल त्रयोद्सि जान।।
एहि पद के अनुसार विद्यापतिक देहावसान कातिक मासक त्रयोद्सि तिथि भेलनि एहि तिथि के लोक एखन धरि प्रमाणिक मानैत छथि ओहुना कातिक मास में  हिन्दू - शास्त्र के अनुसार गंगा सेवन कें बहुत महत्व अछि तैं हिनकर देहावसान गंगा तट पर भेलनि जखन गंगा- लाभ लेल गेल छलाह एहन सेहो मानल जाइत अछि जे विद्यापति जखन प्राणांत करबा लेल गंगा के लेल विदा भेलाह - दू कोष दूर जखन रहथि मोन में एहन जिज्ञासा भेलनि जे हम एतेक दूर गंगा स्नान लेल एयलहूँ कि गंगा दू - कोश हमरा लग नहि एतिह एक रात्रिक विश्रामक बाद लोक दृश्य देखक' अबाक रही गेल गंगा अपन धारा छोडि दू - कोश दूर विद्यापतिक समीप आबि गेल छलिह आजुक समय में सेहो गंगाक धार टेढ़ नजर अबैत अछि ओहि स्थानक नाम छई मऊ वाजिदपुर जे कि आब समस्तीपुर जिला में अछि (पहिले दरभंगा जिला में छल )मानल जाइत अछि जे ओहिठाम हुनकर देहावसान भेलन्हि एहन मानल जाइत अछि जे हुनक समाधि स्थल पर शिव - मंदिर आई धरि विद्यमान अछि
विद्यापति जी के लेल एकटा विद्वानक विचार एहि तरहे अछि - ऐना देखलासँ   स्पष्ट अछि जे संसार में विद्यापतिक समान व्यापक दृष्टीयुक्त चिरंतन कवी बड्ड कम भय चुकल छथि हिनका युग -कवि कहव हिनक महत्ता घटायव थिक, हिनका देश कवि वा राष्ट्र कवि कहव हिनका टूटपुजिआं सँ कुचित  दृष्ट संपन्न दुग्गी - तिग्गी कविक पाँति में बैसाएब थीक - हिनका मैथिलीक कवि कहव वाँग- भाषी, खसकुरा-भाषी, उत्कल-भाषी, लोकनि सँ विद्यापति कें छिनव होयत जकर अधिकार ककरो नहि - जतबय मिथिला मैथिलीक कवि , ततबय भारतक नहि सम्पूर्ण विश्वक कवि रूप विष्णुक एक चिरंतन महावतार छथि
हम ओहि विद्वानक शव्द कें पुर्णतः यथोचित मानैत छी , कारण शास्त्रोगत अछि जे विष्णु शिव के भक्त शिव विष्णु कें तैं   मानवा में कतहु कोनोटा गुन्जाएश नहि बुझना जाइत अछि जे विद्यापति कवि रूप में विष्णुक महावतार नै छलाह प्रमाणिक तौर पर शंकर रुपी उगना कि आम व्यक्तिक सेवादार सकैछ ? तैं हमरा सब के आब इहो बुझि हुनक अराधना करबाक चाहि जे स्वयं विष्णु रामावतार कृष्णावतार के बाद पुनः विद्यापतिक महावतार लय मिथिलाकें संग - संग जगत के कवितामय वाणी सँ उद्धारक प्रेरक बनि कवि रूप विष्णुक एक चिरंतन महावतार  मिथिलाक उद्धारक मिथिला कें प्रकाशित कय गंगा के अपना नजदीक बजा, हमरा जनैत कहीं जल समाधि ने नेने होइथ   
एहन विचारोपरांत अगर देखल जाए विद्यापति विन कोनो महाकाव्यक रचना कएनहू विद्यापति गुरूक -गुरु , पंडितक -पंडित ,महाकवि में तेना महाकवि रहलाह अछि जेना वेद्हिमे में साम वेदादि कहि भगवान् अपनाकें विष्णुक व्यापकता प्रतिपादित कएने छथि
कतए विद्यापति कतए एखन के लोक , कि जानत हुनकर प्रभुताई - बस ओहिना जेना लिखने छथि
उपमा तोहर कहब ककरा हम , कहितहूँ  अधिक लजाई
यौ, विद्यापति कते अपनेक करब बड़ाई ।।
चलू आब करि समारोहक विषर्जन - आब अपने लोकनि देखैत छि सरस्वती पूजा , दुर्गा पूजा , काली पूजा , अन्य पूजा में मंदिर में पूजा बाहर जे कार्यक्रम होइत अछि ओहि में  नौटंकी , अश्लील - अश्लील संगीत ऐना बुझना जाइत अछि जे सांस्कृतिक कार्यक्रम नहि अपितु मनोरंजनक नाम पर किछु आर परसल जा रहल अछि ठीक ओहि प्रकारें विद्यापति समारोह जे मनाओल जाइत अछि ओहि में विद्यापतिक मुखौटा मात्र, किछु विशिष्ट नेता गणक स्वागत किछु स्थानिय वर्चस्वक लोकनिक स्वागत आर किछु ख़ास नहि ओहि सं संस्था संस्थागत सदस्य लोकनि कें किछु स्थानिय वा किछु दूर तक पहचान जरुर बनि जाइत छनि
हमर आग्रह जे विष्णु तुल्य विद्यापति के पर्व समारोह में मनोरंजन सं बेसी विद्यापतिक कृतिक गान , चर्चा, कवि साहित्यक नव चर्चा ,स्वर्गीय विद्वान जनक चर्चा, वर्तमान विद्वान सं आजुक नव जन मानस के परिचय , जाहि में हुनक ज्ञान , रचना, अनुभव, के सर्व प्रथम परसल जेबाक चाही मुदा दुर्भाग्यबस एहन तरहक विचारधारा कें अहूठाम कमी पाओल गेल अन्यत्र सेहो देखबा में अबैत अछि
ओना कुलमिलाक बहुत सुख शांतिक संग एही पर्वक कार्यक्रम सफल रहल बाबा विद्यापतिक जे कि हमरा नजरि में विष्णु तुल्य छथि, हुनक  अशिर्बाद सबकें प्राप्त भेलन्हि   अस्तु
संजय कुमार झा - नागदह
डी एल एफ अंकुर विहार
लोनी , गाजियाबाद      8010218022

    

सीता माता वंदना

तर्ज़ & जय जय भैरवि अशुर भयाऊनि
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जय जय सीता मिथिला तारिणी  
जनक धिया सुखदाई 
सुंदर सुमति दिय हे माता
दुःख निवारू माई 
जय जय सीता मिथिला तारिणी। 
अति कोमल राम ह्रिदय वासिनी  
हनुमत के आहां माई 
रावण राक्षस  मारक कारण  
रामक नाम देखाई
जय जय सीता मिथिला तारिणी ।
गोर वरन नयन अतिसुंदर    
मधुर वचन तोर माता 
पति परमेश्वर मात्र आहां बुझल 
दोसर कियो ने विधाता 
जय जय सीता मिथिला तारिणी ।
हनुमत के आहां अमर बनाओल 
पति के आज्ञा सिरु अपनाओल
लव - कुश के स्वाबलंबी बनाओल 
संजय के ने बिसरू माता 
जय जय सीता मिथिला तारिणी ।


संजय कुमार झा "नागदह" 
Dated : 05/08/2013

याद आबि गेल......

ओ प्राथमिक विद्यालयक प्रांगण
प्रांगण में नीमक गाछ 
प्रवेश भेलाक उपरान्त 
स्कूलक साफ़ सफाई स्वयं अपने हाथ
एक - एक टा नीमक पात ओ डाँट
हाथ सँ चुनि - चुनि बाहर फेकनाई
एहन छल स्कूलक सफाई 
याद आबि गेल.........
पुनः प्रार्थनाक घंटी 
सब छात्र ओ छात्राक पंक्ति 
हाथ जोड़ि - सरस्वती के याद क'
प्रार्थना ओ स्तुति 
जयति जय जय माँ सरस्वती 
जयति वीणा धारिणी 
सिंह पर एक कमल राजित 
ताहि ऊपर भगवती 
जयति जय जय माँ सरस्वती 
जयति वीणा धारिणी
याद आबि गेल.........
स्कूल में चलैत छल 
सब विषयक वर्ग नित 
शनि दिन क ' विशेष रहैत छल 
गीत ओ संगीत 
छात्र के कतवो नीक कला हो 
छात्रा गवैत छलीह गीत 
याद आबि गेल .....
भेटल साल भरि शिक्षा 
तदोपरांत होइत छल परीक्षा 
परीक्षाक पहिल दिन 
खड्डा ओ बाढ़नि
जे अनलक जतेक सुन्दर 
भेटैत छल तकरा - ततबे बेसी नम्बर
स्कूलक सफाई ओहि सँ हो 
वा नहि 
मुदा 
मास्टर साहेब अपना घरक 
एहि मादेक खर्च सँ 
साल भरि लेल भ' जाइत छलाह 
मुक्त 
याद आबि गेल .....


संजय कुमार झा "नागदह"
दिनांक: 08/09/2014
(गुरु जी माफ़ करथि - सत्य बजनाइ सेहओ अपने सिखाओल अछि )

मिथिला राज्यक मांग आ औचित्य - दिल्ली,मिथिला मिरर-संजय झा

मिथिला राज्यक मांग आ औचित्य


दिल्ली,मिथिला मिरर-संजय झाः भारत में त एहन एहन राज्य अछि जाहि में ८-१० टा जिला के मिलाक' राज्य बनल अछि । जखन कि मिथिला के मांग त' २८ -३० टा जिलाकेँ मिला क' कएल जा रहल अछि जे प्रायः एही तरहे अछि - मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, सुपौल, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, मधेपुरा, सहरसा, कटिहार, समस्तीपुर, मुज़फ्फरपुर, बेगुसराय, खगरिया, वैशाली, भागलपुर, बांका, गोड्डा, साहेबगंज, पश्चिमी चम्पारण, पूर्वी चम्पारण, देवघर, दुमका, पाकुर, जामतारा, जमुई, लक्खीसराय, शेखसराय आ अन्य । मिथिला के पहचान कोनो आई सँ नै छैक, इ त' युग - युग सँ अपन नाम सँ जानल जाइत अछि। खास क' जे सब हिन्दू धर्म सँ छथि आ जे मुस्लिम भाई हिन्दू शास्त्र के जनैत छथि ओ सब वेद, पुराण ओ रामायण एहन ग्रन्थ में मिथिला नामक जप त कए चुकल छथि आ नित्य कए रहल छथि। मिथिला के लोक - समाज एतेक सभ्य ओ सभ्रांत भेलाक उपरान्तो ब्रिटिश इंडिया सँ ल' क' स्वतंत्र भारत भेलाक बादो मिथिलाक ऊपर ककरो नजरि उचित ढंग सँ नहि पड़ल जेना कि आन - आन राज्य पर पड़ल छल ।
१८५७ में पहिल स्वतंत्रता संग्राम के बाद अंग्रेज देश के खंडित आ कमजोर करबा में काफी सक्रीय छल । ओहि समय में नेपाल आ ब्रिटिश इंडिया के मध्य में जमिक' युद्ध सेहो भेल छल । एहि युद्ध (१८१४- १८१६) के बाद अंग्रेज अपन सत्ता के सुदृढ़ करबाक लेल ०४ मार्च १८१६ को सुगौली संधि केलक जाहि में भारतके मिथिला क्षेत्रक भू- भाग करीब पांच हजार वर्गमील नेपाल के दय देलक । ई संधि ' ईस्ट इंडिया कम्पनी आ नेपालक गोरखा राजा के मध्य भेल छल। मिथिलावासी पर इ अन्याय त सबसँ पहिने अंग्रेज केलक आ मिथिला के तेजस्वी भूमि के दू देश में बांटी मिथिलाक लोककेँ देशी - विदेशी कहवा पर सेहो मजबूर केलक । सम्भवतः एहि पाप के कारन माता मैथिलीक श्राप सँ ओ एही ठाम सँ भगबाक लेल बाध्य भेल होयत आ मिथिलाक स्वतंत्रता सेनानी के हमुमान जी जँका आशीर्वाद सेहो प्राप्त भेल होयत । नेपाल में जे मैथिली भाषी ओ मिथिलावासी जिला अछि से प्रायः एही तरहे अछि - परसा, बारा, रौतहत, सरलाही, महोत्तरी, धनौसा, सिरहा, सप्तारी, सुनसारी, मोरंग आ झापा एही में सँ किछु जिला के भाग सुगौली संधि के समय में ईस्ट इंडिया कम्पनी (ब्रिटिश इंडिया ) नेपाल के द' देलक । ओहि समय में एक परिवार के अंग्रेज तोड़ि क’ दू टुक कए देलक ।
इ अन्याय मिथिलावासी वर्दास्त क' अंग्रेज के भगाबक लेल एकजूट भेलाह जे कोनो ना अंग्रेज के भगावी तदोपरांत अपना में निपटि लेब जाहि सँ देश अनेक टुकड़ा - टुकड़ा नहि होए। १९१७ में भारतक जे कोनो साहित्यिक भाषा छल तकरा परीक्षाक अन्यतम विषयक रूपेँ कलकत्ता विश्वविद्यालयक कुलपति स्वर्गीय सर आशुतोष मुखर्जी प्रतिष्ठित कएलनि । तकर परिणाम स्वरुप हिंदी, बंगला, मणिपुरी, असमिआक संग संग मैथिली मएट्रिकसँ लए बी० ए० धरि मातृभाषाके रूपे त' परीक्षार्थी गृहीत भेवे कएल, संग संग पाँच मात्र साहित्यिक भाषाक एम० ए० क मुख्य विषयक रूप में जे स्वीकृत भेल ताहिमध्य मैथिली सेहो छल । मैथिली के अपन लिपि छैक जे मिथिलाक्षर सँ जानल जाइत अछि । मैथिली भाषा के एकटा ठोस स्तम्भ छैक । कारन एकरा अपन लिपि, व्याकरण आ आजुक समय में करीब ५ सँ ७ करोड़ लोकक ई भाषा छैक ताहि हेतु मैथिली के ठोस भाषा के रूप स्थापित कएल गेल जा सकैछ । सबसँ पहिले शिक्षाक दृष्टिकोण सँ सर्व प्रथम कलकत्ता विश्वविद्यालय द्वारा मातृभाषा के रूप में मैथिली प्रतिष्ठित कएल गेल अछि । बंगला, मणिपुरी, आसामी, सबके अपन - अपन राज्य भेटलैक जखन कि मैथिली भाषा के सेहो साहित्यिक दर्जा भेटल छल परन्तु ई शांत मिथिला, न्यायायिक ग्रन्थ लिखनिहार मिथिला के पुस्तक पढ़ि मिथिले के उपेक्षा कएल गेल आ दोसर - दोसर के राज्य भेटल ।
ई केहन न्याय भेल मिथिला संग से कहि नहि ? १९२० में कोंग्रेसक नागपुर अधिवेसन में राज्य निर्माण के लेल भाषा के प्राथमिक मह्त्व देल गेल आ आगा चलि एही आधार पर कतेको राज्य बनल । जेना कि उड़ीसा, आंध्रा प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मद्रास ( वर्त्तमान के चेन्नई) आ आसाम, जाहि में आसाम प्रथम राज्य बनल जे मूलतः भाषा के आधार पर बनाओल गेल । १९२१ ई० में असहयोग आंदोलन के फलस्वरूप जखन राष्ट्रिय भावना के उद्भव भेलैक ओहि समय में हिंदी के खूब प्रचार कएल जा रहल छलैक । खास कए अंग्रेजी के बहिष्कार करबाक लेल जखन कि हिंदी प्रायः राष्ट्र भाषा के स्थान पाबि चुकल छल । ओहि समय में काका कालेलकर मैथिली भाषीय क्षेत्र दरभंगासँ बिना धन्यबाद लेने अपन सम्भासन मंच छोडि चल गेलाह । सिर्फ ऐहि कारण जे ओ मंच सँ कहलाह जे ई हिंदी भाषीय क्षेत्र अछि, एही पर हुनका शांतिपूर्वक विरोध कए देल गेलनि जे हिंदी भाषीय क्षेत्र नहि अपितु मैथिली भाषीय क्षेत्र मिथिला अछि ।
सर जॉर्ज़ गियर्सन के माध्यमसँ भारतक प्रायः समस्त भाषा के सर्वेक्षण कएल गेल जाहि मध्य मैथिली सेहओ छल । मैथिली भाषाक सबसँ पहिल व्याकरण लिखनिहार सर जॉर्ज़ गियर्सने छथि, जे कि १९२७ में प्रकाशित छैक । परन्तु भाषाक आधार पर राज्य बनेनिहार भारतीय प्रतिनिधि लोकनिकें मुख मिथिला दिससँ कियाक विमुख भेलनि से जानि नहि । हुनकर सभक ध्यान एमहर के ल' जाइत से कहि नहि ! १९३७ में कलकत्ताक कांग्रेस अधिवेशन में फेर भाषाक आधार पर राज्य बनेबाक बात दोहराओल गेल लेकिन फेर मिथिला राज्य बनेनिहार प्रतिनिधि लोकनिक परिधि सँ बाहर भ गेल. । १९४७ में भारत स्वतंत्र भेल आ १९५० सँ १९५६ धरि भाषा के मुख्य आधार मानैत कतेको राज्य बनल । परन्तु मिथिला कतय ? कियो एकरा खोज पुछारी केनिहार नहि छल । एही कारण मिथिलावासीकेँ बहुत मानसिक कष्टक सामना करय पड़ल आ १९५० -१९५२ अबैत अबैत छोट - मोट आंदोलन होमय लागल । १९७२ - ७३ में जखन डॉ अमर नाथ झा बिहार लोकसेवा आयोगक अध्यक्ष बनलाह तखन मैथिलीकें आयोगक एक विषय के रूपेँ प्रस्ताव स्वीकृत भेल ।
मुदा प्रस्ताव तावदधरि स्वीकृत प्रस्ताव रहल जखन धरि स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रकें भारत में प्रतिष्ठाक उदय नहि भेल छल । ओहि समय में कांग्रेस के बिहारक मुख्यमंत्री स्वर्गीय केदार पाण्डेय छलाह आ हुनक अथक प्रयास सँ मैथिली के एकटा मुख्य केंद्र मिथिला विश्वविद्यालयकें स्थापना कएल गेल आ संगहि लोकसेवा आयोग में मैथिलीके एक ऐच्छिक विषय के रूप में आरम्भ कएल गेल । १९९२ में जखन श्री लालू प्रसाद यादव जी बिहारक मुख्यमंत्री छलाह मैथिली विषय के बिहार लोकसेवा आयोगसँ हटा देल गेल । एहीसँ मिथिलावासी बेसी आक्रोशित भेलाह आ मैथिली के अष्टम अनुसूची में दिएबाक संग संग मिथिला अलग राज्यक मांग के लेल कमरतोड़ मेहनत, आंदोलन, धरना प्रदर्शन केलाह जकर फलस्वरूप मैथिली के भारतक संविधान के अष्टम अनुसूची में पूर्व प्रधान मंत्री माननीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जीक कृपासँ २२ दिसंबर २००३ क' स्थान भेटल । जाहिसँ भाषाक आधार पर राज्यक मांगक रास्ता फुंजल कारण पहिने ई कहि टारि दैत छल जे अगर भाषा संविधानक अष्टम अनुसूची में नहि त भाषाक आधार पर राज्यक चर्चा नहि कएल जा सकैछ ।
माननीय श्री अटल बिहारी बाजपेयी जीक कएल एहि कार्यक उपकार कदाचित मिथिलावासी कहियो नहि विसरि सकत । तदोपरांत राज्यक मांग अनवरत रूपे होइत रहल अछि । मिथिला राज्य आंदोलनक मुख्य भूमिका 'मिथिला राज्य संघर्ष समिति', 'अंतर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद्,','मिथिला राज्य निर्माण सेना', 'संयुक्त मिथिला राज्य संघर्ष समिति' आ अन्य प्रायः कतेको वर्ष सँ कए रहल अछि । जाहि में 'मिथिला राज्य संघर्ष समिति', सँ स्वर्गीय जयकांत मिश्र अपन जीवन पर्यन्त राज्यक मांग आ मैथिली में प्राथमिक शिक्षा के लेल सरकार सँ लड़ैत पञ्चतत्व में विलीन भ' गेलाह । हुनक एक नारा एखनो मिथिला राज्यक मांग केनिहार आंदोलनी सब सदिखन लगबैत छथि - "भीख नहि अधिकार चाहि - हमरा मिथिला राज्य चाहि". ओना जखन सँ "मिथिला राज्य निर्माण सेना" एहि आंदोलन में पैर रखलक ताहि दिनसँ आंदोलन आगिक धधरा जँका सम्पूर्ण मिथिला में पसरी रहल अछि ।
एहि आंदोलन के एकजूट करबाक लेल हमरो तरफ सँ एकटा नारा देल गेल अछि - "हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई - जे बसथि मिथिला, ओ मैथिल भाई " कारण मूल बात मिथिला के थिक । आ मिथिला में रहनिहार सब कियो पहिले मैथिल छथि । बिहार सरकारक संग संग भारत सरकार सेहो मिथिला क्षेत्रसँ ध्यान हटा लेने अछि, जकर फलस्वरूप कतेको समस्या बढ़ि चुकल अछि आ नव - नव समस्या सब उपजि रहल अछि । बहुतो रास पौराणिक ऐतिहासिक चीज विलुप्त भे चुकल अछि आ वांचल खुचल सेहओ विलुप्त होएबाक कगार पर अछि । जकरा बचेबाक लेल मिथिलावासीकें मिथिलाराज्य के अलावा अन्य कोनो मार्ग देखबामे नहि आवि रहलन्हि अछि । मिथिला राज्यक मांग सिर्फ भाषाके प्रमुख आधार नहि अछि अपितु एकर अनेकानेक बहुतो कारण प्रायः एहि तरहे अछि ।
जेना कि - संवैधानिक अधिकार सम्पन्नता के लेल, संस्कृति आ सभ्यता के संरक्षण के लेल, विशिष्ट पहिचान 'मैथिल' के संरक्षण के लेल, पलायन आ प्रवासी होबाक खतरा सँ मिथिला के रक्षा लेल, आर्थिक पिछडापण आ उपेक्षा विरुद्ध स्वराज्यसम्पन्न विकास के लेल, स्वरोजगार संयंत्र - उन्नत कृषि - औद्योगिक विकास के लेल, बाढ़िक स्थायी उपचार के लेल, शिक्षा के खसैत स्तर में सुधार के लेल, मुफ्त शिक्षा और शत-प्रतिशत साक्षरता के लेल, गरीबी उन्मुलन - हर व्यक्ति के लेल रोजी, रोटी आ वस्त्रक लेल, जातिवादिताक आगि सँ जड़ी रहल समाज में सौहार्द्रताक लेल, ऐतिहासिक संपन्नता प्राप्त धरोहरके संरक्षणक लेल, पर्यटन केन्द्रक स्थापना, विकास आ संरक्षण के लेल, जल-स्रोतक समुचित बहाव के व्यवस्थित करवाक लेल, मिथिला विशेष कृषि उत्पाद के व्यवसायीकरण के लेल, जल-विद्युत परियोजना - जल संचार परियोजना के लेल, मिथिला विशेष शिक्षा पद्धति (तंत्र ओ कर्मकाण्ड सहित अन्य कला ) के अध्ययनक केन्द्र लेल, पौराणिक मिथिला देश के समान आर्थिक संपन्नता के लेल, पौराणिक न्याय प्रणाली समान उन्नत सामाजिक न्याय व्यवस्था के लेल, जन-प्रतिनिधि द्वारा वचन आ कर्म में एकता के लेल, भ्रष्ट आ सुस्त-निकम्मा प्रशासन तथा जनविरोधी शोषण के दमन करवाक लेल, मुफ्त बिजली, पेयजल, शौच, गंदगीक उचित बहाव व्यवस्थापन के लेल, मिथिला दोसर देशक सीमावर्ती क्षेत्र होएवाक कारन विशेष सुरक्षा के लेल,
मिथिला में कतेको पैघ -पैघ नदी छैक जेना महानंदा , कोसी , गंडक , कमला , बालन ,बूढी गंडक , गंगा इ नदी सबसँ एखन धरि नुकसान के अलाबा फयदा कोनो नहि भेल, एतेक नदी होएबाक बादो हम सब बिजली - पाइनक समस्या सँ परेशान छि, एहि लेल एकर सबसँ रक्षा आ एकर सुरक्षा के लेल । एकर एकटा जीवन्त उपमा अछि जे १९३४ क भूकम्प सँ टुटल करीब १.८ किलोमीटरक कोसिक पुल मिथिलावासिक कतेको हो हल्ला केलाक बाद करीब ७८ वर्षक बाद बनि सकल । जकर उद्घाटन बिहारक मुख्यमंत्री माननीय श्री नीतीश कुमार जी द्वारा फरवरी २०१२ में कएल गेल । एहना स्थिति में विकासक संग मिथिला राज्यक मांग स्वाभाविक छैक जाहि सँ मिथिला यदि अलग होएत त अपना विकासक लेल अपने अग्रसर होयत । चाणक्यक एकटा श्लोक याद पड़ि गेल – पुस्तकस्था तू या विद्या पर हस्त गतम् धनम् - कार्य काले समुत्पन्ने न सा विद्या न तद्धनम् ।
अर्थात पुस्तक में लिखल विद्या आ अपनों धन यदि दोसर के हाथ में रहत त समय पर काज नहि देत । तैं विद्या याद करवाक चाहि आ धन अपने लग रखबाक चाहि । यदि आई हमरा सबहक़ मिथिला राज्यक मांग पूरा भ' गेल रहैत त' मुंहतक्की में नहि रहितहुँ । तै आब बिना मिथिला राज्य दोसर कोनो आन उपाय देखबा में नहि आबि रहल अछि ।
‘‘इ लेखक कें अपन विचार छनि’’
http://www.mithilamirror.com/news-detail.php?id=285

मैथिलक लेल पाग शोभा मात्र नहि, संस्कार सेहो थिक - दिल्ली,मिथिला मिरर-संजय झा

मैथिलक लेल पाग शोभा मात्र नहि, संस्कार सेहो थिक
दिल्ली,मिथिला मिरर-संजय झाः पाग - सम्माने नहि अपितु संस्कारो पागक संस्कार के शुरुआत अगर ब्राम्हण जाति सँ देखि त सबसँ पहिने एकर उपयोग उपनयन संस्कार के मड़ब ठट्ठी (अर्थात जाहि दिन मड़बा के बन्हबाक दिन होएत छैक) ताहि दिन सँ शुरू होइत छैक, ओहो नव नहि अपितु पुरान पाग सँ ,कारन कदाचित इ मानल जाएत होय कि बालक एखन पूर्ण संस्कार नहि पओलाह अछि तै पुरान पाग पहिराओल जाए. इ क्रम अपनयन संस्कार के समस्त विधि व्यवहार के संपन्न करैत केश कटाएलाक बाद स्नान सँ सुद्ध होएबा तक रहैत अछि. तदोपरांत जखन स्नान कए नव वस्त्र धारण कएल जाएत अछि तखन नव वस्त्रक संग - संग नव पाग सेहो वरुआ के पहिराओल जाएत अछि, इ बुझि जे आब ई एही योग्य संस्कार युक्त भय गेलाह, अर्थात पूर्ण शुद्धि गायत्री मंत्रोपरांत, पाग- बस्त्र धारण मंत्र के संग पहिराओल जाएत अछि.
पागक अनिवार्य दोसर चरण विवाह में देखल में जाएत अछि आ संग - संग ओही वर्षक वरक पावनि- तिहार में सेहो परन्तु ओही पाग में आलरी - झालरी जोड़ि क' व ओहुना. संस्कार युक्त पागक चरण मुख्य रूप सँ मात्र दू देखल यदा - कदा तेसर वा चारिम चरण होएत होए कही नहि. आब जौं देखि त बाँचल सम्मान, जे मिथिला में प्रायः लोक अपन आमंत्रित अतिथि वा सम्बन्धी लोकनि के विदाई स्वरुप भेंट में सम्मानित कय पाँचो टुक वस्त्र के संग - संग अपना ओही ठाम सँ पाग पहिरा बिदा करैत छथि, अर्थात अपना ओहिठाम ई पाग एकटा सम्मान सूचक अछि. ओना जौं देखल जाए त' माथ पर रखबा योग्य सबकिछु बहुतो भाषीय - प्रांतीय लोकक रीती रिवाज़ में सम्मान सँ जोड़ल गेल अछि, चाहे ओ सरदारजीक पगड़ी हो वा राजस्थानीक पगड़ी वा अन्यत्र कतहु कोनो आर नाम सँ, मुदा मिथिलाक सुप्रसिद्ध मैथिलक इ पाग छी माथ परहक ताज छी.
अगर उदहारण स्वरुप देखि त सबकियो अपना -अपना घर - आँगन में किनको ने किनको बजैत सुनने होयब जे माय के बेटी कहैत छथि - धिया रखिह तू नैहर के मान कि बाबू के पाग रखिह, पाग एकटा गर्भित सम्मान अछि जे कि नहियो माथ पर रहला सँ सदैव विदयमान रहैत छैक वा ओ बड़का पाग बाला छथि अर्थात सम्मानित व्यक्ति छथि, पाग दिअनु अर्थात सम्मान दिअनु. पागक हर रंग के अलग - अलग पहचान आ अर्थ छैक, जेना उपनयन आ विवाह में मात्र लाल रंगक पाग पहिरल जाइत अछि आ क्रीम रंग या पीअर या अन्य रंगक पाग सिर्फ सम्मान देबाक बास्ते उपयोग कएल जाएत अछि. मात्र बीसेक वर्ष पूर्व पागक खूब चलन छल, लेकिन ओहु समय में बुजुर्ग लोकनि पाग पहिरि सर- कुटुंब लग पहिर जाइत छलाह, अनिवार्य रूप सँ बरियाती में ताहि में त' कोनो मेष- वृषक बाते नए, परन्तु आब त पाग पहिर जएबा में कदाचित लजाइत छथि. एही एक - दू वर्ष में पुनः पागक प्रचलन के बढ़ाबा देखल जा रहल अछि, ओहु में एक ठाम हम अपना आँखि सँ देखल जे जतेक बुजुर्ग लोकनि छलाह से सब कियो पाग पहिर बरियाती आयल छलाह कदाचिद इ बुझी जे जाहि गाँव बरियाती जा रहल छि ओहि ठामक लोक दूर नहि कहय.
ओ बरयाती सुदई सँ नागदह श्री हेम चन्द्र झा "बौआजी" ओहिठाम आयल छलाह. ओना नागदह में सेहो भव्य स्वागत भेलनि ताहि में कोनो संदेह नहि. एकटा समय छल जखन पाग सभ मैथिल वर्ग आ वर्णक लोक समय - समय पर पहिरल करथि, तकर ब्राम्हण का कर्ण दुई जाति सँ भिन्न जातिक लोक क्रमशः सर्वथा बहिष्कार कए देल. एम्हर अबैत - अबैत त' आब से हाल भेल अछि उपनयन काल में बरुआ तथा विवाह - द्विरागमन काल में वर मात्र अनिवार्यतः पाग पहिरल करैत अछि. वरियातिक लेल पाग पहिरब विरल भए चुकल अछि. मिथिला में जतय पाग सँ एक दोसर के सम्मानित कएल जाईत अछि त' दोसर दिस संस्कार के सेहो पूर्ण करैत अछि. अतः इ कहबा में कोनो अतिश्योक्ति नहि जे पाग मैथिलक पहचान आ सम्मान मात्र नहि अपितु संस्कार सेहो अछि. अतः मैथिल समाज सँ आग्रह जे पुनः सब वर्ग आ वर्णक लोक एही सम्मान आ संस्कार युक्त पाग के अपन माथ पर राखि मिथिला के निखारक प्रयास करथि.
Name: Saket
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Review's: Sanjay jee samay aa parithiti k anusar sab k badalbak chahi muda apan sanskriti riti riwaaz ney chhorbak chahee,ehai t maithil k paihchan chhiay
Name: KRANTI JHA ROSHAN-SAURATH(UTARVARI TOLA)
Email-ID: krantijharoshan@gmail.com
Review's: Mithilak prasidh Machh, Pan, Makhan, Pag aadi achhi. Pag samman, pratishtha aa vidvata ke suchak thik. Chhuchhe Page pahira sa nai hoyat ! jahina Pag maan ke suchak thik tahina hamra lokni ke Pago ke maan rakhak chhahi. Apna sanskriti ke nai bisrai jau .....e dharohar ke bacha ka rakhai jau. Jai Mithila ! Jai Maithili !!!!!!!!!!!!!!

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समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा

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