शनिवार, 16 जनवरी 2016

हकार


हर्षक संग मैथिल जन के पठवी प्रेम हकार 

मातृभाषा दिवस पर मैथिली साहित्यक चर्चाक भेल अछि विचार 


कोना बचायब, कोना बढ़ायब मैथिलीक मान सम्मान 

एही सब बात पर चर्चा खातिर बजाओल गेल छथि मैथलीक विद्वान 


नव संस्था नव ऊर्जाक लेल जड़ाओल जाएत दीप

प्रारम्भ होयत सभाक संचाल भ' गोसाउनिक गीत 


---संजय झा "नागदह" 8010218022
आज अन्ना जी फिर से जंतर - मंतर पर सरकार के किसान वरोधी विधेयक के खिलाफ - 
क्या ख्याल है आपका ?
धरती की महत्त्व वो क्या जाने ?
जिसने कभी न बोया बीज 
फसल उगाया मेह्नत करके 
भींगा पसीना से सम्पूर्ण शरीर 
वो क्या समझे पीर ?
मत छीनो ये धरती उससे 
रहने भी दो थोड़ी 
बढ़ते जनसंख्या को देखो 
कहाँ से लाओगे तुम रोटी
अधिग्रहण का ग्रहण लगाकर 
हो गए कितने भूमि हीन
थोड़ी सी तो बची हुई थी 
उसको भी तुम रहे हो छीन
संजय झा "नागदह"

नव कुलदीपकक संकेत


सपनेहुँ देखल एक झलक 
पट सुति पैर हिलाए रहल 

पुनि जिज्ञासा आर बढ़ल
देखहुँ मुख कुल तारिणी 

जिज्ञासा हहृदयक बुझि कुल दीपक 
ठाढ़ होइत पूर्ण स्वरुप देखाओल

गोर वर्ण देह छरहरा 
कोमल - कोमल अंग 

हाथ - पैर हिलाई रहल 
मंद - मंद मुस्काई रहल 

ठाढ़ नाक आ आँखि डोका सन
स्वपनहि संग खेलाइ रहल

झलक देखाई पुनि चलि गेल 
कृष्ण बाल रूपमे मटकी देल 

मन आनंदित आँखि खुजि गेल 
नव कुलदीपकक संकेत सन बुझना गेल

रवि दिन ०८ /०२/२०१५

08 फरवरी 2015 क' सपनामे देखल अपन अजन्मा भातिजकेँ  जकर जन्म 08 -03-2015 क' भेलैक। 

गंदे पानी की धार जब तेज रहती है तो उसके ऊपर की झाग बहुत सफ़ेद और सुन्दर दिखती है जबकि अंदर किसी भी तरह की परिवर्तन नहीं होती . वही जब स्थिर होता है तो वो अपना पूर्ण स्वरूप में ही दीखता है . इसलिए जरुरी नहीं है की सुन्दर दिखने बाली मनुष्य , वस्तु सुन्दर ही होगा इसे गहराई से जांच और परखना चाहिए . शायद यही कारन होगा की सेक्सपेयर ने कहा होगा - "All that glitters is not gold" 

                                                                - Sanjay Jha "Nagdah"

जकड़ा हूँ - बेड़ियों के बिना

कई वर्षों के बाद
उनको देखा , 
पलक एकाग्र है 
आँखें बाते कर रही है 
जवाँ निःशव्द है 
धड़कन की गति 
शताव्दी एक्सप्रेस 
फिर भी दुरी इतनी 
ना कोई हॉल्ट
ना कोई स्टेशन 
जी करता है 
लपक कर पकड़ लूँ 
मिल लूँ गलें 
और कहूँ
फिर मत जाना प्रिये 
समय बड़ा बईमान है 
पता नहीं 
फिर इस तरह 
आएगा 
की नहीं 
पर 
करूँ क्या 
जकड़ा हूँ 
बेड़ियों के बिना 

----संजय झा "नागदह" १९/०४/२०१५

समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा

  आज मेरे पास एक अद्वितीय पुस्तक आई है—*समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा* (मैथिली संस्करण), जिसे संकलित किया है श्रीमती कुमकुम झा एवं श्री राज...

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