शनिवार, 16 जनवरी 2016

गंदे पानी की धार जब तेज रहती है तो उसके ऊपर की झाग बहुत सफ़ेद और सुन्दर दिखती है जबकि अंदर किसी भी तरह की परिवर्तन नहीं होती . वही जब स्थिर होता है तो वो अपना पूर्ण स्वरूप में ही दीखता है . इसलिए जरुरी नहीं है की सुन्दर दिखने बाली मनुष्य , वस्तु सुन्दर ही होगा इसे गहराई से जांच और परखना चाहिए . शायद यही कारन होगा की सेक्सपेयर ने कहा होगा - "All that glitters is not gold" 

                                                                - Sanjay Jha "Nagdah"

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा

  आज मेरे पास एक अद्वितीय पुस्तक आई है—*समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा* (मैथिली संस्करण), जिसे संकलित किया है श्रीमती कुमकुम झा एवं श्री राज...

आहाँ सभक बेसी पसन्द कएल - आलेख /कविता /कहानी