शनिवार, 16 जनवरी 2016

हे माय तोरा प्रणाम

 उठ रौ बौआ , उठ रौ बेटा
भ' गेलै आब भोर 
कतेक करबै आब तु देरी 
सूर्यो भेलथि इन्होर ।

जाउ नहाउ आ जल्दी सँ आउ
जलखै भ' गेल ठंढा  
झटपट आहाँ पहिर लिअ 
पेंट, जूता ओ अंगा 

उठाऊ झोड़ा, जाउ पाठशाला 
नै त' लागत डंडा
मुँहक बोल छै कड़गर ओकर 
ह्रदय बहाई छै गंगा ।

बोली बचन जूनि पुछु, कखनो रसगुल्ला 
तँ कखनो , तितगर नीमक पात सन 
एक रति जौं कष्टमे देखत 
छड़पटाय लागत - बिन पाइनक ओ माछ सन ।

उम्र हमरो आब बहुत भेल 
भ, गेलहुँ हम जवान 
तैयो ओकरा एहने लगए छै 
इ अछि एखनो अज्ञान।

आब बुझाइया,
किया बुझैया इ हमरा अज्ञान 
ठेंसो जखन हमर पुत्रकें लागय 
निकलि जाइत अछि प्राण ।

हे माय तोरा प्रणाम !! हे माँ तोरा प्रणाम !! हे माँ तोरा प्रणाम !!!


संजय झा "नागदह"

 DATED 12/09/2014

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