एकसर विद्यापति
ठाढ़ केलाह मैथिलीक मीनार
एहन मीनार
जे दुनियाँ देखय
कतेक केलाह
एहि पर विचार।
कतेक मैथिलीक विद्वतजन
खोदि - खोदि देखला मीनार
केहन पदार्थ लगाओल एहिमे
अछि एखनो धरि संदिग्ध विचार।
नज़रि कतेको के टिक नहि सकल
कियाक
मीनार तs छैक सूर्य सँ सटल
करय पड़त नित
एहि लेल योग
तखनहि भेटत
एकर संयोग।
खोदला सब कियो मिलि जैड एकर
नोचय - पटकयमे लागल छथि सब
नहि बुझि सकल
कियो आदि - अंत
तइयो,
कोरियाबयमे लागल अछि सब।
मैथिली भाषाक स्तम्भ
ओ ठाढ़ केलाह
नहि नेतागिरीमे भाग लेलाह
नहि केलाह कहियो
धरना ओ प्रदर्शन
करेलाह
कलम मात्र सँ
दुनियाँ के मिथिलाक दर्शन ।
आऊ
हम सब मिलि करि
हिनक बन्दन
एहि मैथिल पुत्र
मैथिलीक पुत्रकेँ
"संजय"क अछि
चरण बंदन।
संजय झा "नागदह "
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