शोक , शोकानुकूले पर
नोर, चोटायल घाते पर
राति होय वा भोर
चाहे
एहन सन किछु
टटका होय कि बसिया
छन भरिक आगि
जरा दैत छैक
कि - कि ने !!
-----संजय झा "नागदह" 01/07/2015
आज मेरे पास एक अद्वितीय पुस्तक आई है—*समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा* (मैथिली संस्करण), जिसे संकलित किया है श्रीमती कुमकुम झा एवं श्री राज...
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