शनिवार, 16 जनवरी 2016

छन भरिक आगि

शोक , शोकानुकूले पर 
नोर, चोटायल घाते पर 
राति होय वा भोर 
चाहे
एहन सन किछु 
टटका होय कि बसिया 
छन भरिक आगि 
जरा दैत छैक 
कि - कि ने !!


-----संजय झा "नागदह" 01/07/2015

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा

  आज मेरे पास एक अद्वितीय पुस्तक आई है—*समयक हस्ताक्षरः शेफालिका वर्मा* (मैथिली संस्करण), जिसे संकलित किया है श्रीमती कुमकुम झा एवं श्री राज...

आहाँ सभक बेसी पसन्द कएल - आलेख /कविता /कहानी